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Covid-19 Effects on Rakhi Festival

कोविड वाली राखी: भारत देश एक त्योहारों का देश है। जनवरी से लेकर दिसम्बर तक त्योहारों की बौछारें हमें पूरे साल भिगोती रहतीं हैं। अगर साल से त्यौहार निकाल दिए जाएं तो happiness index में हम कम से कम 20 steps नीचें गिर जायेंगें।

नफरतों के अंधेरों के बीच ये त्यौहार ही हैं जो प्यार की ज्योति जलाए हुए हैं। ऐसे में जब कोविड-19 ने दुनिया को चपेट में ले रखा है तो  हमारे त्यौहारों का  भी इसके काले साये से बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।

इस साल की मीठी ईद तो पहले ही फ़ीकी पड़ चुकी है अब कोविड के अगले निशाने पर राखी का त्यौहार है। जब दो गज़ की दूरी हो तो बहन का भाई के हाथ पर राखी बांधने उसके माथे पर तिलक लगाने और उस अपने हाथ मिठाई खिलाने के सुखद अहसास वाली तमन्ना न जाने कैसे पूरी हो?

जहां राखी का असली महत्व अपनों को क़रीब लाना है वही कोविड का उद्देश्य दूरियां बढ़ाना है। पर ये ज़िम्मेदारी हम सब की है कि इन दूरियों को हम फासलों में switch ना होने दें।

हम भारतीय  हमारे त्यौहारों पर दिल खोल कर ख़रीदारी करतें हैं।और बाज़ारों में रौनक देखते ही बनती है। एक joke भारत में बहुत मशहूर है कि जब दिवाली और राखी पर अलमारी खोलो तो सब कपड़े पुराने लगते हैं और अगर होली पर अलमारी खोलो तो सब कपड़े नए लगतें हैं। त्यौहार की खरीदारी में कपड़ों का एक अहम हिस्सा होता है।

 लेकिन मौजूदा हालातों के चलते हमारी ख़रीदारी करने के तरीके और ढंग दोनों में बदलाव आना स्वाभाविक है।

तो आइए एक एक करके देखते हैं इस स्वाभाविक बदलाव की।

1)ऑनलाइन शॉपिंग की बादशाहत बढ़ेगी:-easy internet access और खरीदारी पर मिलने वाले मोटे डिस्काउंट ने ऑनलाइन शॉपिंग को पहले ही पापुलर बना दिया है। इस सबके साथ साथ सरल एक्सचेंज और रिटर्न् की प्रकिर्या सोनें पर सोहागा है। मौजूदा वक़्त में जब लोग बाहर जाना avoid करेंगें तो पहले से मार्किट में अपने पँजे जमाती -कॉमर्स  कंपनियों की सेल में exponential  उछाल आएगा। लेकिन त्यौहार से पहले साथ में बाहर जाकर खरीदारी करना, खाना पीना और मस्ती करनी। ऑनलाइन शॉपिंग कभी उस मस्ती का option नहीं दे पाएगी।

2) सस्टेनेबल फैशन में उछाल:- जबसे प्रधानमंत्री ने लोकल पर वोकल होने का नारा दिया है, लोगों का रुझान सस्टेनेबल फैशन ( sustainable fashion ) की तरफ बढ़ा है। हम सभी इस राखी पर उन विकल्पों को तलाशते मिलेंगें जिन्हें लोकल में बनाया गया हो।

3) फ़ास्ट फैशन की धीमी रफ्तार : एक मशहूर कहावत है कि फ़ैशन हवा को रफ्तार से बदलता है। आज जो महँगे कपड़े ट्रेंडी लुक दे रहें हैं कल वही कपड़े कब आपको out dated  लोगों की श्रेणी में खड़ा कर देंगे पता ही नही चलेगा | इसलिए पल पल बदलते trend पर नज़र रखना ज़रूरी हो जाता है। पर अब दुनिया के ज़्यादातर कपड़ो के कारख़ाने बंद पड़े हैं। ऐसे में फ़ास्ट फैशन रूपी खरगोश बगल में पड़ा हुआ कही सुस्ता रहा है और सस्टैंअबल फैशन रूपी कछुआ धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए फास्ट फैशन को मात देता नज़र आ रहा हैं।

4) कपड़े पहनने का ढंग: whatsapp पर एक forwarded message आया था जिसमे एक शोरूम पर शेरवानी पहने dummy,  शेरवानी के ही कपड़े और और उसी डिज़ाइन का मास्क पहने हुए था। पहली नज़र में ये भले ही हमारे होंटो पर मुस्कान ले आये पर ये सच है कि मैचिंग के कपड़े पहनने की चाह हमें मैचिंग मास्क पहनने पर आतुर कर रही है।

अगर राखी के साथ उसी डिज़ाइन का मास्क बिकता मिले, तो ये अतिश्योक्ति नहीं होगी।

5) कम्फर्ट ओवर शो-शा: अक्सर फैशनेबल कपड़े सुकून नहीं देते। हम किसी भी सोशल गैदरिंग में जितना ट्रेंडी होते हैं उतना restless फील करते हैं और घर आते ही हम सुकून देने वाले कपड़े तलाशते हैं। अब जब इस राखी पर सोशल गैदरिंग की जगह सोशल डिस्टेनसिंग ने ले ली है तो लोगों का जोर कम्फर्ट क्लोथिंग पर होगा।

यूं तो बदलते वक्त के साथ कुछ भी बदल जाए पर एक चीज़ जो कभी नहीं बदलेगी वो है भाई और बहन का प्यार और रक्षाबंधन उसी प्यार को सेलिब्रेट करने का एक जरिया है।

त्यौहार मनाने का तरीक़ा भले ही बदल जाए पर एक भाई का अपनी की रक्षा करने का जो वादा है वो कभी कमज़ोर नही पड़ना चाहिए।

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